आत्मसम्मान
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विधा- कविता
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जग में सबसे बड़ी चीज,
कहलाता है जन में ज्ञान।
तन और मन से बड़ी है,
कहलाता है आत्मसम्मान।।।
जिसमें आत्मसम्मान नहीं,
वो जन हो पत्थर समान।
आत्मसम्मान से भरा दिल,
कहलाता है आत्मसम्मान।।
बीच चौराहे खड़ा है संत,
दे रहा है सच्चा एक ज्ञान,
कभी नहीं गिरने पाए जन,
निज कोई आत्मसम्मान।
आत्मसम्मान के बल पर,
दूर जगत खड़ा नजर आये,
समाज उसकी प्रशंसा करे,
हर जन बीच सम्मान पाये।।
खोकर आत्मसम्मान जन,
जी लेते हैं कुछ इस संसार,
उनकी देख लेना होती है,
हर हाल मोड़ पर बस हार।।
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स्वरचित/नितांत मौलिक
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* होशियार सिंह यादव
मोहल्ला-मोदीका, वार्ड नंबर 01
कनीना-123027 जिला महेंद्रगढ़ हरियाणा
फोन 09416348400
परतंत्र
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विधा- कविता
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थे परतंत्र कभी परिंदे, आज हुये आजाद,
एक रहो और एक रहेंगे,करते है फरियाद।
कैसे कैसे कष्ट मिले जब होता है पराधीन,
मन आनंद से भर जाता,जब होते स्वाधीन।
गुजरा जमाना बेड़ी का,बंधन में रोया करते,
आजादी कोसो दूर थी, बोलने से भी डरते।
आज परिंदों की भांति,भारत देश है आजाद,
कितने वीरों ने खाई फांसी,अंग्रेज बने जल्लाद।
उस परिंदे से बात करो, जो हो गया आजाद,
उस बंधन की बात को, करते रहते फरियाद।
बंधन में जो बांधते, उसकी देख लो औकात,
कभी रात का दिन हो, कभी दिन की हो रात।।
परतंत्रता का दर्द सहकर, चले गये जो लोग,
स्वतंत्रता का क्या आनंद, नहीं लगाया भोग।
किसी को दास बनाकर रखे, होता यह रोग,
स्वतंत्रता मिले खूब जहां, होता वहीं संयोग।।
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स्वरचित/नितांत मौलिक
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* होशियार सिंह यादव
मोहल्ला-मोदीका, वार्ड नंबर 01
कनीना-123027 जिला महेंद्रगढ़ हरियाणा
फोन 09416348400
KANINA MOHALLA-MODIKA WARD-01 DISTRICT-MAHENDERGARH(HARYANA) PIN-123027 Mob 91+9416348400
Sunday, June 12, 2022
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