जहरीलें
जहरीले सांप डंक मारते,
मरना निश्चित मानते लोग।
दवा दारू का मौका मिले,
बचना जीवन होता संयोग।।
पर सांपों से विषैले इंसान,
नहीं पता कब डस जाएंगे।
दवा का भी मौका न मिले,
जीते जी जरूर मर जाएंगे।।
**डा. होशियार सिंह यादव
कनीना,महेंद्रगढ़,हरियाणा**
मेहनत
मेहनत लिखती जन किस्मत
फिर क्यों किस्मत रोना रोते।
कैसे फसल लोग काट पाएं,
जब वे धरा नहीं बीज बोते।।
हिम्मत हारकर बैठे जाते हैं,
कहते हैं लोग भ्रष्टाचार भरा।
जब पौधों को नहीं सिंचोगे,
नहीं बढ़ेगा नहीं होगा हरा।।
**डा. होशियार सिंह यादव
कनीना,महेंद्रगढ़,हरियाणा***

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