मां
मां ममता की खान बताई,
जान सको तो जान सचाई।
जग का हर इंसान मानता,
उसकी जग संतान बताई।।
बलिदान करे प्राण अपने,
पूरे कर दे सारे ही सपने।
दया का सागर भरा मिले
नहीं पराया सब हैं अपने।।
***डा. होाियार सिंह यादव
कनीना,महेंद्रगढ़,हरियाणा
ज्ञान
ज्ञान का सागर भरा हुआ, फिर भी अज्ञानी है लोग,
दूसरे की गलती छांटना, जन-जन में बढ़ा एक रोग।
पाप,अहित का इस जग में, लगा रहे कितने ही भोग,
परहित,सेवा करते मिलते, कहलाता है यह संयोग।।
बुरा जमाना,बुरी बुराई, कहते आये कितने ही संत,
वक्त रहते सुधर न पाए, उस जन का मानों हो अंत।
सच्ची बातें जरूर फैलाना, बुरी बुराई मिले नहीं तंत,
सुबह सवेरे नमन करो, पूजा का अधिकारी है अरिहंत।
***डा. होशियार सिंह यादव,कनीना,हरियाणा

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