चेहरा
चेहरा सुंदर मिल जाये,अंदर से हो मलीन,
बड़ा लोग उसे मानते,चाहे बजाता हो बीन।
गुणों की कद्र नहीं है, निर्गुण खाते हैं खीर,
चेहरे से हो सांवला, अक्सर उठाता है पीर।।
गाड़ी में बन ठन चले,मानते हैं उसे अमीर,
पैदल,साइकिल पर चले,निर्धन समझे लोग।
संतों को गाली मिले, कैसा जग का संजोग,
अच्छे को बुरा कहते,बहुत बुरा जग में रोग।।
***डा. होशियार सिंह यादव,कनीना,महेंद्रगढ़
कुत्ते
कुत्ते से दोस्ती बुरी बताई,
दुख पाये गर प्रीत लगाई।
कुत्ते की लार रेबीज भरे,
बिना मौत ही इंसान मरे।।
कुत्ते से बुरे हैं कुछ लोग,
फैलाते रहते रोग ही रोग।
ये लोग अगर काट जाये,
जीवन में खूब दर्द भोग।।
**डा. होशियार सिंह यादव
कनीना,महेंद्रगढ़,हरियाणा

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