शकुनी-जयचंद
शकुनी, जयचंद बढें
अब,
रावण नहीं हुए कहीं कम।
विभीषण बढ़ते ही जा रहे,
परिवार का निकालते दम।।
सुभाष, भगत सिंह कम हैं,
अंग्रेजी हुकूमत सिर बोले।
राजगुरु, सुखदेव बुला दो,
अंग्रेजों की पोल अब खोले।।
***डा. होशियार सिंह यादव
कनीना,महेंद्रगढ़,हरियाणा***
कौन बचाएगा?
ये समय गुजर जाएगा,
फिर हाथ नहीं आएगा।
बुराई जन की छोड़ दो,
वरन कोई ना बचाएगा।।
पाप बुराई साथ चले न,
धर्म कर्म संग में जाएगा।
कोई ऐसा कर्म कर लेना,
हर दिल में बस जाएगा।।
***डा. होशियार सिंह
कनीना,महेंद्रगढ़,हरियाणा


No comments:
Post a Comment