Thursday, December 04, 2025

          

  कबूतर
सबसे पुराना डाकिया,
जी रहा है बदहालात।
कुएं, खंडहर कम बचे,
कहां बिताए बेचारा रात।।
पालते थे राजा महाराजा,
करता था सैन्य जासूसी।
मारके खा रहे लोग इन्हें,
कबूतर छाई अब मायूसी।।
***डा. होशियार सिंह
कनीना,महेंद्रगढ़,हरियाणा

           शेर
जंगल का राजा कहलाता,
शिकार मारकर रोज खाता।
राष्ट्रीय प्रतीक बना देश का,
छुप छुपके यह दाव लगाता।।
दहाड़ लगाता कांप उठे वन,
थर-थर कांपे जीवों का तन।
नाना प्रकार के जीव मिलते,
पर शेरों से सजता उपवन।।
**डा. होशियार सिंह यादव
कनीना,महेंद्रगढ़, हरियाणा




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