औरत
औरत देती आई है जग को पैगाम,
परिवार का कर सकती ऊंचा नाम।
परिश्रम कर सकती है सुबह शाम,
इच्छा हो तो घर को बना दे धाम।।
ठान ले अगर कर दे दिन की रात,
चाहे तो वो कर दे घर बुरे हालात।
चाहे तो धन को आलिंगन कर ले,
वरना चाहे दौलत को मार दे लात।।
***डा. होशियार सिंह यादव***
विश्व रिकार्डधारक, कनीना*****
धिक्कार
टांग अड़ाते कामों में,
मजे लूटते एक हजार।
ऐसे जीते जी मर जाते,
उनका जीना धिक्कार।।
बनते काम में मददगार,
तब बढ़ता है प्रेम प्यार।
गिरते को थामना सीखो,
यहीं जीने का आधार।।
**डा. होशियार सिंह यादव
कनीना,महेंद्रगढ़,हरियाणा**

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