नहीं सुधरेंगे
राक्षस जन नहीं सुधरते,
लाख लगा लो तुम जोर।
जब कोई आंख दिखाये,
वो जमकर मचाते शोर।।
नहीं सुधरे वो न सुधरेंगे,
करते समाज भट्ठा गोल।
मुख से प्रभु का नाम नहीं,
बोलते मिलेंगे कड़वे बोल।।
**डा. होशियार सिंह यादव
कनीना,महेंद्रगढ़, हरियाणा
कांटे
कांटों पर जो राह बनाते,
वो जग में नाम कमाते हैं।
फूलों की सेज सोने वाले,
एक दिन सोये रह जाते हैं।।
कितने आये कितने गये हैं,
फिर किस पर अरमान करे।
सच्चे इंसान वहीं कहलाते,
जो पाप कर्मों से नित डरे।।
**डा. होशियार सिंह यादव
कनीना,महेंद्रगढ़,हरियाणा

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