चापलूस
चापलूस हो गये हैं लोग,
चढ़ा बड़ा चापलूसी रोग।
झूठी शान में जीते कितने,
पाप कर्म नित रहे हैं भोग।।
सच को कहना लगे बुरा,
मौका मिले घोंप देते छुरा।
सचाई की होती अब हार,
कल्कि करेंगे ये बेड़ा पार।।
**डा. होशियार सिंह यादव
विश्व रिकार्डधारक,कनीना
कीमत
झूठ बोल, चाहे धोखा दे ले,
जग कीमत चुकानी पड़ती है।
दिन बेचारा असहाय होता है,
जब रात कालिमा बढ़ती है।।
काले पर नहीं रंग चढ़ पाता,
चाहे कोई भी रंग चढ़ा लेना।
राख बने फिर हवा में उड़ती,
चाहे खूब जन को सता लेना।।
***होशियार सिंह यादव
कनीना,महेंद्रगढ़,हरियाणा

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