Sunday, November 16, 2025

      सुमन
मन से सुमन कहलाती थी,
हर मन को बड़ा हर्षाती थी।
घर में खुशियां छा जाती थी,
जब सामने तुम आ जाती थी।।
मां को भी प्यारी लगती थी,
परिजन दिलों में बसती थी।
सास देखके प्रसन्न होती थी,
बिछुडऩे पर दर्द में रोती थी।।
जाने का दर्द दे गई जग में,
किसको अपनी बात सुनाये।
धोखा अब लगता जाने का,
दे गई लाखों दुख दर्द सजाएं।।
***डा. होशियार सिंह यादव
विश्व रिकार्डधारक,कनीना,हरि.


नहीं भूला पाएंगे
यूं छोड़के जगत से जाना,
एक सपना सा लगता है।
15 साल बीत चुके अब,
खालीपन सा खलता है।।
आठ साल शादी को बीते,
मनहूस दिन वो आया था।
17 नवंबर 2019 को हमें,
जमकर तुमने रुलाया था।।
चले गये हमको छोड़कर,



पर हम नहीं तुम्हें भुलाएंगे।
जहां भी रहते हो स्वर्ग में,
एक दिन पास में आएंगे।।
**डा. होशियार सिंह यादव
कनीना,जिला-महेंद्रगढ़,हरि.

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