Tuesday, November 04, 2025

                      देव दीवाली
देवता भी देखने आते, दे


व दीवाली कहलाती,
कितनी प्राचीन परंपरा, हमको यही बतलाती।
पंचगंगाघाट पर 1915 में की गई ये शुरुआत,
हजारों दीये जलाये गये, दीवाली जैसे हालात।।
शिवभोले ने इस दिन,त्रिपुराराक्षक किया वध,
त्रिपुरारि कहलाये, समझ नहीं पाते लोग चंद।
देवों ने स्वर्गलोक में भी, जलाये थे दीप हजार,
काशी में लाखों दीप जले, गंगा स्नान से प्यार।।
***डा. होशियार सिंह यादव, कनीना***
जिला-महेंद्रगढ़,हरियाणा************* ***

               अंग्रेज आज भी हैं
कहते हैं अंग्रेज चले गये, जो सच्ची लगती बात है,
पर अंग्रेज आज भी हैं, लोगों को बांटने में हाथ है।
किसी की तारीफ करते हैं, किसी को बुरा कहते हैं,
ये कहीं दूर नहीं अपितु अपने समाज में ही रहते हैं।।
क,ख आता नहीं, व्यक्तित्व पर अंगुली उठाते देखे,
आकंठ भ्रष्टाचार में डूबे, दूसरे पर कीचड़ वो फेंके।
आएगा वो दिन भी, समाज इक दिन जाग जाएगा,
बचकर नहीं जाने देगा, बोटी तक नोचकर खाएगा।।
**डा. होशियार सिंह यादव,कनीना, हरियाणा

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