मोर
राष्ट्रीय पक्षी देश का,
अद्भुत होती है छटा।
नृत्य करें ये उपवन,
आसमान छाए घटा।।
मोरपंख कृष्ण धारण,
सृपों का करता अंत।
मोरनी चाल प्रसिद्ध,
गुण गाये कवि, संत।।
**डा. होशियार सिंह यादव
कनीना,महेंद्रगढ,हरियाणा
गाय
गाय पालना भूल गये अब,
कुत्ते पालने का शौक बढा।
गाय का मलमूत्र काम का,
कुत्ते का दबाते खोद गड्ढा।।
अमृतसम वो दूध, घी देती,
भूल गया क्यों इंसान भला।
गाय पालेंगे हर घर घर पर,
ऐसा कोई अभियान चला।।
***डा. होशियार सिंह यादव
कनीना,महेंद्रगढ़,हरियाणा**

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