याद
छोड़ गये अपने कभी,
आती है उनकी बड़ी याद।
अब वो मिल न सकते,
चाहे कर लो लाख फरियाद।।
याद आते वो दिन अब,
रहते थे जिनके कभी पास।
हवा चलती हैं सर्द तब,
उन्हें याद कर रुकती सांस।।
पर्व,खुशी जब आती हैं,
उनकी याद सताती रहती।
एक दिन पास आएंगे,
अन्तर आत्मा बस ये कहती।।
डा. होशियार सिंह यादव, विश्व रिकार्डधारक
कनीना,जिला-महेंद्रगढ़, हरियाणा*******
अत्याचार
चार दिन की जिंदगी में,
करते लाखों अत्याचार,
खूब सताते दिलों को वे,
मौत के आगे होती हार।
कुछ खुद की खुशी हेतु,
कर देते जन जीना हराम,
पाप कर्म से भरा है दिल,
कैसे निकले जी हे राम।
परहित को चाहने वाले,
पा जाते हैं जग में नाम,
दुखों में दुखी मिलते हैं,
स्वर्ग मिलता उन्हें धाम।।
***डा. होशियार सिंह यादव,कनीना,हरियाणा

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