Monday, September 08, 2025


 कविताएं

               चंद्र ग्रहण
चंद्र ग्रहण चल रहा, देख लो जरा आज,
खगोलीये घटना है, नहीं छुपा कोई राज।
नंगी आंखों से देखो,सुंदर नजारा खिलेगा,
सूर्य ग्रहण न देखो,नुकसान बड़ा मिलेगा।
भोजन खराब नहीं हो,न कोई हो नुकसान,
विज्ञान तर्क देखो, बनो नहीं अब अज्ञान।
सूर्य पृथ्वी चंद्र हो सीध में, ग्रहण कहाये,
मिलके नभ को देखो,बड़ा मजा फिर आये।।
**डा. होशियार सिंह यादव,कनीना
विश्व रिकार्डधारक, महेंद्रगढ़,हरियाणा

             आदत
कुत्ते की आदत हैं टांग उठाकर मूतना,
राक्षस की आदत वैसी जैसी थी पूतना।
चोर साहब की आदत जन को दर्द देना,
संत की आदत दर्द अपने सिर पर लेना।
चोरी जिसने सीखी छोड़ ना वो पाएगा,
भरी भीड़ में देखो थपाथप वो खाएगा।
करनी का फल मिलता देर नहीं सवेर,
सोच समझ ले वक्त है मिले नहीं फेर।।
**डा. होशियार सिंह यादव,कनीना
विश्व रिकार्डधारक,महेंद्रगढ़,हरियाणा

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