Saturday, September 06, 2025

 कविताएं

  बाढ़

बाढ़ ने लील लिये कितने पशु और इंसान,
करोड़ों का नुकसान हुआ,बने लोग बेजान।
सहायता उनको चाहिए,बढ़ा सेवा के हाथ,
प्रकृति को रोद्र रूप, कितने हो गये अनाथ।
सेवा ऐसा उपकार है, देता जन मन आराम,
सेवा करो असहाय की, छोड़कर सब काम।
परोपकार की भावना,जिसके दिल में आज,
प्रभु एक दिन ऐसे जन को, देता देखा ताज।।
**होशियार सिंह यादव,कनीना,महेंद्रगढ़
विश्व रिकार्डधारक, हरियाणा




 चापलूस
हिंदी आये न अंग्रेजी, चमचा बना घूमता है,
ब्लैकमेलिंग की हद करें,दौलत को चूमता है।
कलंक बना शिक्षा क्षेत्र, गोबर का ज्ञान नहीं,
बचकर रहना लोगों उससे, मिलता गर कहीं।
उल्टे धंधे करता रहता, तेरी बैंगन मेरी छाय,
पैसे गर उधार दिये, करते रहो यूं हाय-हाय।
मारो डंडा ऐसे नीच को, तब समझ आएगी,
वरना दुष्ट की आदत, हर जन दिल दुखाएगी।।
**होशियार सिंह यादव,कनीना,महेंद्रगढ़,हरि.


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