Friday, September 12, 2025

 



कविताएं
 करनी भरनी
करनी का फल मिलता है,
चाहे लगा ले कितना जोर,
आज वो गया,कल जाएगा,
मचा हुआ पूरे जग में शोर।
वक्त बदलता है पल में तो,
भिखारी भी बन जाए राजा,
धन दौलत और घमंड डूबे,
क्षण में बज जाएगा बाजा।।
**डा. होशियार सिंह यादव
कनीना, जिला-महेंद्रगढ़,हरि

 मतलब का व्यवहार
कितने भूखो मर रहे, कितने भरे भंडार,
कितना दौलत भरी,नहीं देने को तैयार।
कितने ही अमीर है, धोखे का व्यापार,
गिरते पड़ते मिले, बस जीने का आधार।
अपने पराये हो गये, कलियुग की मार,
अन्न के तो भंडार भरे, नहीं मिले उधार।
कितने दोस्त बनते, मतलब का व्यवहार,
चोर साहब को देखिये, चोरी से ही प्यार।।
**डा. होशियार सिंह यादव पत्रकार
एवं लेखक,कनीना,महेंद्रगढ़,हरियाणा


           इंसान
इंसान बनो, हैवान नहीं,
सत्कर्म करो, पाप नहीं,
परहित करो, लगे सही,
दाता से डरो, धर्म यही।
सत्य बोलों, बात तोलो,
कर्म करो, धर्म है यहीं,
मधुर बोलो,कड़वा नहीं,
मरेंगे सभी,विधान यही।।
**होशियार सिंह यादव
कनीना,महेंद्रगढ़, हरियाणा

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