Tuesday, September 02, 2025

 कविताएं


           वर्षा
कहीं फसल बर्बाद न हो जाये,
बरसात का है दौर अभी जारी।
फसल पैदावार ले ले किसान,
तो फिर वर्षा भी लगेगी प्यारी।।
जोर नहीं चलता उस दाता पर,
होगा वहीं जो उसने रच डाला।
रुक जाये कैसे भी यह बरसात,



बस करो प्रार्थना लेके के माला।।
**डा. होशियार सिंह यादव
कनीना, जिला-महेंद्रगढ़,हरियाणा

         स्वार्थ
धोखा दे रहे हैं जिनको मानते हैं खास,
स्वार्थ की दुनियां,किस पर हो विश्वास।
जरूरत हो पैसे की, बन जाते जन दास,
देने होते पैसे तो झट से बजा देते बांस।
मात पिता आज दिन मिलते बड़े उदास,
कराहते बुजुर्ग तो हंसते देखे बच्चे पास।
पैसे खातिर कत्ल करें, रिश्ता जाए भूल,
मोटा कर्ज लेकर के, जाते फांसी पे झूल।।
**डा. होशियार सिंह यादव,कनीना
   विश्व रिकार्ड धारक, महेंद्रगढ़, हरि.

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