Thursday, September 18, 2025

 कविताएं
  कलियुग

मात पिता का गला घोट दे,
ये कैसा कलियुग आया है।
जहां भी देखे देश विदेश में,
आतंक ही आतंक छाया है।।
किस पर अब विश्वास करे,
अपना भी लगता पराया है।
धन दौलत की खातिर देखो,
कितना बड़ा जुल्म ढहाया है।।
पहले ही बुजुर्ग दर्द मेें होते,
उस पे अब उनकी खैर नहीं।
सोच समझकर कदम बढ़ाना,
दुश्मन बैठा हो घर में कहीं?
**डा. होशियार सिंह यादव,
कनीना,महेंद्रगढ़,हरियाणा**


                 नाम
चोरी,झूठ,कपट भरा दिल पाते जग में नाम,
ईमानदारी पर चलके देखो मिले नहीं काम।
अमीर,लफंगों पर करते जन धन की बौछार,
पर दो रुपये मांगकर देखो मिले नहीं उधार।।
धन दौलत तिजोरी भरी, उनकी बड़ी है मांग,
बीड़ी,सिगरेट,भांग, धतूरा, पीते शराबी भांग।
परस्त्री को तकते रहते कहलाते है चरित्रवान,
इसलिये प्यार से बोलो, जय हो भारत महान।।
***डा. होशियार सिंह यादव, कनीना
विश्व रिकार्डधारक, महेंद्रगढ़, हरियाणा







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