सोच
कुछ किस्मत का रोना रोते,
कुछ चादर तानकर यूं सोते।
कुछ समय बीते बीज बोते,
कुछ जिंदगी व्यसन में खोते।।
किस्मत बदले मेहनत करके,
कभी प्रभु गीत गा जी भरके।
जो वक्त पर सही बीज बोते,
जीवन जीते नहीं डर डरके।।
**डा. होशियार सिंह यादव
कनीना,महेंद्रगढ़,हरियाणा
नवरात्रे
फसल कटाई हो चुकी,
शारदीय नवरात्रे आये।
मां की नौ रूपों में पूजा,
बस मन मंदिर बसाये।।
सर्दियोंं ने दस्तक दे दी,
गर्म कपड़ों की तैयारी।
गर्मी को दे दो विदाई,
सर्दी लगती जन प्यारी।।
***होशियार सिंह कनीना
महेंद्रगढ़,हरियाणा

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