लो आई गर्मी
हलक सूखने लगा अभी से,
उष्णता सताने लगी है इंसान।
बेहतर प्रबंध कर पेयजल के,
जल पर ही टिका है जहान।।
जीवन का आधार कहलाता,
जीव जंतुओं के प्राण बचाता।
सजल नेत्र जब जन रो पाता,
पानी है जो इंसान को हंसाता।।
***डा. होशियार सिंह यादव
कनीना,महेंद्रगढ़,हरियाणा****
मेला
बाबा मोलडऩाथ की सुंदर एक कहानी,
हर जगह शिविरों में मिला भोजन-पानी।
शक्कर का प्रसाद चढ़ा देखे नर और नारी,
सुंदर छवि बाबा की बसी मन में न्यारी।।
ऊंट,घोडिय़ां दिखा रही करतब न्यारे न्यारे,
अपार भीड़ देख रही,देख रहे बच्चे हमारे।
बाबा आश्रम सजा हुआ मन में उतार लो,
बाबा की महिमा को मन ही मन विाचारे।।
**डा. होशियार सिंह यादव,कनीना
महेंद्रगढ़, हरियाणा विश्वरिकार्ड धारक

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