Wednesday, February 04, 2026


 कुतरूं



कुतरूं प्राचार्य देखे हमने,
काम रोकते शिक्षकों का।
कलुषित उनके विचार हैं,
व्यवहार लगे भिक्षकों का।।
ओछेपन से भरे मिलते हैं,
राज समझे निज बाप का।
कत्र्तव्य से मुंह मोड़ते वो,
जहर भरा ज्यों सांप का।।
**डा. होशियार सिंह
कनीना,महेंद्रगढ़,हरियाणा


      गीत
गीत पुराने मीत पुराने,
आते जन को याद है।
सुनते रहे, मिलते सदा,
ईश्वर से ये फरियाद है।।
नाम पुराने, धाम पुराने,
हर मन में भरते प्यार हैं।
नाम रटों संत, देवों का,
जीवन मिला उधार है।।
**होशियार सिंह यादव
कनीना,महेंद्रगढ़,हरियाणा



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