भुला ही कब
विधा-कविता
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भुला ही कब आपको, हरदम किया याद,
दूर गये जब भी तुम, दिल करता फरियाद।
चैन मिला नहीं दिल को,नहीं मिला करार,
क्या बतलाऊं आपको, कितना तुमसे प्यार।।
बेटा गया विदेश में,आती उसकी बड़ी याद,
कभी हँसते कभी रोते, सता रही सदा याद।
भुला ही कब उनको, हर वक्त करते हैं बात,
उनकी याद बहुत बुरी, बुरी हो गई हालात।।
शिक्षा पाई जिनके कदमों में,वो गुरु महाराज,
लंबा अरसा बीत गया, नहीं हुई है मुलाकात।
अब तो नौकरी लगी, आती बड़ी उनकी याद,
बेचैन हुआ गुरु खातिर, मिलने को फरियाद।।
पाला पोषा जिन्होंने ने, देकर सहारा यूं रोज,
खा पीकर खुश रहे, मन में रही हरदम मौज।
दूर हो गये मात पिता, याद आती है हर दिन,
रो रोकर बेचैन हुये हैं,दिन बीत रहे गिन गिन।।
दोस्त सखा मिले जिंदगी,मिलकर हँसते गाते,
आज बिछुड़ गये वो सभी, दिन यूं बीत जाते।
बहुत याद करते उनको, भुला ही कब पाएंगे,
समय मिला तो छुट्टी लेके,मिलने को जाएंगे।
बचपन के दिन हसीन थे,हँस हँसकर हैं बीते,
क्या अजब गतिविधियां, कितनों के मन जीते।
भुला ही कब उन दिनों को,आती उनकी याद,
याद करे कभी उन दिनों को, हो जाते उन्माद।।
साधु मिले थे जिंदगी, बैठे थे उनके जब पास,
ज्ञान मिला अनमिट सदा, मुलाकात थी खास।
उनकी याद बड़ी आती,जब साधु मिलते रोज,
पर उनको ढूंढ पाना कठिन,करते उनकी खोज।।
बहुत कुछ खोया जिंदगी, पत्नी ने छोड़ा साथ,
2010 का वर्ष नवंबर माह छुड़ा गई वो हाथ।
बहुत दर्द में जीते हैं, भुला ही कब उन्हें पाये,
उनके संग बीते दिनों को,याद कर हम लुभाये।।
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स्वरचित/मौलिक
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* डा. होशियार सिंह यादव
मोहल्ला-मोदीका, वार्ड नंबर 01
कनीना-123027 जिला महेंद्रगढ़ हरियाणा
फोन 09416348400







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