जितने निभाये जा सके
विधा-कविता
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वादे करो बेशक हजार, खरा उतरना चाहिए,
जितने निभाये जा सके, उतने निभाने चाहिए।
दुनिया पास बुलाती है,चाहे पास नहीं जाइये,
धोखा देती है पल में वो,धोखा मत न खाइये।।
रस्में होती जीवन में,संख्या मिलती कई हजार,
पर वो इंसान कहलाता, जो करें इनसे ही प्यार।।
सदा निभानी चाहिए, जितनी निभाई जा सके,
रस्मों से जो दूर रहे, जीवन हो जाता है बेकार।।
यारी दोस्ती है कठिन, करके देख लेना कभी,
दोस्ती करते हैं लाखों, खरे उतरते कभी कभी।
दोस्ती निभाना फर्ज है, दोस्ती निभानी चाहिए,
जितनी निभाई जा सके, बस आनंद ही पाइये।।
दर्द नहीं दो कभी किसी, प्यार से ही हँसाइये,
हर गिरने वाले जन को, प्यार से ही उठाइये।
नफरत भरा यह संसार है, नफरत से बचाइये,
तिरस्कृत जो हो चुके, प्यार से गले लगाइये।।
लाखों लोग मिलते जहां, कोई हँसे कोई रोता,
जब किसी दर्द सताता, नयनों को वो भिगोता।
दोस्ती में दगा मिले, वो जन छुप छुपकर रोता,
हानि कभी जब हो जाये, वो नींद नहीं सोता।।
कर्तव्यों से बना जीवन, इनको निभाना चाहिए,
हरेक कदम पर कर्तव्य नया, लो मिल जाइये।
कर्तव्य निभाना है कठिन,उन्हें निभाना चाहिए,
नई शिक्षा मिल जाये, नई शिक्षा अब पाइये।।
बहुत बुरा कभी जहां,किस्मत जगानी चाहिए,
प्यास तन की हो बुरी, उसको बूझाना चाहिए।
प्यारा बचपन होता सदा, इसमें तो मुस्कराइये,
मर भी जाये अगर कभी,नया जीवन ले पाइये।।
जितने निभाये जा सके, उतने वचन निभाइये,
वचनों में बंधा हुआ, हर इंसान जगत पाइये।
कभी कभी कठिन वचन,खरा उतरना चाहिए,
धर्म कर्म की राह चलो,धर्म सदा ही निभाइये।।
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स्वरचित/मौलिक
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* डा. होशियार सिंह यादव
मोहल्ला-मोदीका, वार्ड नंबर 01
कनीना-123027 जिला महेंद्रगढ़ हरियाणा
फोन 09416348400








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